वेद: एक जीवित दर्शन
वेद केवल ग्रंथ नहीं, अपितु जीवन जीने की कला हैं। आइए समझें उनकी आधुनिक प्रासंगिकता।
पढ़ेंएक गांव की बेटी से वैश्विक वैदिक मंचों तक।
15+ वर्षों से देश-विदेश में वैदिक संस्कृति, राष्ट्र चेतना, संस्कार एवं आध्यात्मिक जागरण का संदेश।
वर्षों की निरंतर साधना, सहस्रों मंच, लाखों हृदय।
हर कार्यक्रम एक स्मरणीय आध्यात्मिक अनुभव।
वेदों, उपनिषदों और दर्शन का सरल, हृदयस्पर्शी विवेचन।
मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के चरित्र की जीवन-प्रेरक प्रस्तुति।
शास्त्रीय एवं लोकप्रिय भजनों की भावपूर्ण संध्या।
भारतीय नारी की गरिमा, शक्ति एवं नेतृत्व पर सशक्त संवाद।
विद्यार्थियों एवं युवाओं के लिए चरित्र, अनुशासन एवं उद्देश्य।
बालकों के लिए वैदिक संस्कारों का व्यावहारिक प्रशिक्षण।
वार्षिकोत्सवों एवं विशेष पर्वों पर मुख्य वक्ता।
राष्ट्र-चेतना एवं सांस्कृतिक पुनरुत्थान के मंच।
विदुषी अंजलि आर्या के यूट्यूब चैनल से चयनित प्रस्तुतियाँ।
एक छोटे गांव की मिट्टी से उठा एक स्वर — दस अध्यायों में।
उत्तर प्रदेश के शामली जनपद के ताना ग्राम में एक साधारण परिवार में जन्म। परिवार में संगीत या मंच की कोई परंपरा नहीं — केवल एक शांत गांव और एक भीतर बहती हुई आत्मा।

दादाजी श्री ओमप्रकाश आर्य उन्हें बचपन से आर्य समाज के सम्मेलनों, यज्ञों एवं वैदिक आयोजनों में लेकर जाते। इन्हीं मंचों ने उनके मन में वेद, संस्कृति एवं समाज सेवा का बीज बोया।

लगभग दस वर्ष की आयु से ही आर्य विद्वानों के व्याख्यान सुनने आरंभ किए। वैदिक साहित्य, भारतीय इतिहास, स्वतंत्रता संग्राम, संस्कार शिक्षा एवं चरित्र निर्माण का गहन स्वाध्याय।

शिवम पब्लिक स्कूल, शामली के सांस्कृतिक मंचों पर दादाजी द्वारा लिखे गए भाषणों की प्रभावशाली प्रस्तुति। यहीं से एक स्वर ने अपना मार्ग चुना।

शामली चीनी मिल विद्यालय के एक संगीतज्ञ से हारमोनियम एवं सुर-साधना का प्रारंभ। पिता श्री धनीराम धीमान का प्रोत्साहन, माता श्रीमती निर्मला देवी का संबल — और निरंतर अभ्यास।

मध्यप्रदेश के धमनार में आयोजित कार्यक्रम में उनके भजनों को असाधारण सराहना। यहीं से उनकी पहचान राष्ट्रीय स्तर पर बननी आरंभ हुई।

लगभग सभी राज्यों में हज़ारों वैदिक, धार्मिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक आयोजनों में प्रभावशाली उपस्थिति। रामायण कथा, गीता संदेश, वैदिक प्रवचन एवं भजन संध्या की एक अग्रणी आवाज़।

मॉरीशस, नेपाल, दुबई एवं अन्य देशों में वैदिक प्रवचन एवं भजनोपदेश। प्रवासी भारतीयों तक वेदों का प्रकाश। वर्ष भर में 300+ कार्यक्रम निर्धारित।

नशामुक्ति, चरित्र निर्माण, वैदिक जीवनशैली, राष्ट्रभक्ति एवं नेतृत्व पर युवाओं हेतु निरंतर मार्गदर्शन। कारागारों में बंदियों के बीच सत्संग एवं चरित्र निर्माण कार्यक्रम।

वैदिक संस्कृति एवं समाज सेवा को पूर्ण जीवन समर्पित करने हेतु आजीवन अविवाहित रहने का संकल्प। एक संस्कारित, जागरूक एवं चरित्रवान समाज के निर्माण की दृष्टि।

“दृढ़ संकल्प, समर्पण और संस्कार — साधारण को असाधारण बना देते हैं।”
हर मंच एक संकल्प।

सात दिवसीय भव्य कथा।

मधुर भक्ति-संगीत संध्या।

वेद-वचनों पर सार-गर्भित व्याख्यान।

नारी सम्मान एवं सशक्तिकरण।

संस्कार आधारित युवा शिविर।

वार्षिक उत्सव एवं यज्ञ।
भारत के सैकड़ों नगर, लाखों श्रोता।
देश-विदेश के आयोजकों, श्रोताओं एवं संस्थाओं के अनुभव।
विदुषी जी का प्रवचन सुनकर हमारे श्रोता आज भी उस संध्या की चर्चा करते हैं।
अंजली जी की उपस्थिति ने पूरे आयोजन को एक दिव्य ऊँचाई प्रदान की।
विदेश में रहकर भी जब उनकी रामायण कथा सुनी, ऐसा लगा मानो भारत स्वयं घर आ गया हो।
हमारे विद्यार्थियों के जीवन में जो परिवर्तन उनके एक संवाद से आया, वह वर्षों के उपदेशों से नहीं आया था।
भजन संध्या में पाँच हज़ार श्रोता घंटों मंत्रमुग्ध बैठे रहे।
आज की पीढ़ी को वैदिक संस्कारों से जोड़ने का जो कार्य वे कर रही हैं, वह राष्ट्रीय महत्व का है।
देशभर के मंचों से — आगामी कार्यक्रम और विगत आयोजनों की झलक।
जल्द ही घोषणा होगी।
शीघ्र ही जोड़े जाएंगे।
“सत्यमेव जयते नानृतम् — सत्य ही विजयी होता है, असत्य नहीं।”
वेद, रामायण, संस्कृति एवं राष्ट्र चेतना पर चयनित लेख।
वेद केवल ग्रंथ नहीं, अपितु जीवन जीने की कला हैं। आइए समझें उनकी आधुनिक प्रासंगिकता।
पढ़ेंश्रीराम का जीवन प्रत्येक भूमिका में मर्यादा का जीवंत उदाहरण है।
पढ़ेंमहर्षि दयानन्द ने जिस वैदिक पुनरुत्थान का स्वप्न देखा, वह आज भी अधूरा है।
पढ़ेंएक स्मरणीय आध्यात्मिक संध्या जो आपके श्रोताओं के हृदय में वर्षों तक गूंजती रहेगी।
तिथि सुरक्षित करेंअपने कार्यक्रम के लिए तिथि सुरक्षित करें। हमारी टीम 24 घंटों में उत्तर देती है।